हरिद्वार। कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होता है। इसीलिए हरिद्वार कुंभ मेला प्रशासन भी जोरशोर से तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार भी मेले में अलग से कुंभ नगर बसाया जाएगा। फिलहाल धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से शिविर लगाने के लिए मेला प्रशासन ने आवेदन मांगे हैं। 30 अक्टूबर तक आवेदन प्रक्रिया चलेगी और उसके बाद भूमि आवंटित की जाएगी।
दरअसल, कुंभ मेला क्षेत्र में साधु संतों की एक अलग ही दुनिया बसती है, जिसे कुंभ नगरी कहा जाता है। कुंभ नगरी में महामंडलेश्वर नगर, शंकराचार्य नगर, आश्रम से जुड़े संतों और विभिन्न धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के अलग-अलग शिविर लगाए जाते हैं। इसके लिए पहले से कुंभ मेले के लिए आरक्षित मैदान में ही साधु-संतों को जमीन दी जाती है।
कुंभ नगर में साधु-संतों के शिविर ही कुंभ की भव्यता को अलग स्वरूप देते हैं। हरिद्वार कुंभ मेले को लेकर मेला प्रशासन ने अब इन शिविरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक धार्मिक और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। मेला प्रशासन ने भूमि आवंटन के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया अक्तूबर के अंत तक जारी रखने का निर्णय लिया है। 30 अक्टूबर के बाद प्राप्त आवेदनों की जांच और जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर निर्धारित स्थानों पर भूमि आवंटित की जाएगी।
प्रशासन का लक्ष्य दिसंबर तक भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने का है, ताकि संत और धार्मिक संस्थाएं समय रहते अपने शिविरों के निर्माण और अन्य तैयारियां शुरू कर सकें। कुंभ के दौरान मेला क्षेत्र में बसने वाला यह नगर किसी धार्मिक शहर से कम नहीं होता। यहां सत्संग, प्रवचन, भजन कीर्तन, यज्ञ, भंडारे से लेकर श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्थाएं की जाती हैं।
अखाड़ों और महामंडलेश्वरों के लिए अलग व्यवस्था है। कई अखाड़ों के साधु संत अपनी भूमि पर शिविर लगाते हैं। जैसे बैरागी कैंप में बैरागी अखाड़ों के लिए भूमि आवंटित की जाती है। अखाड़ों के महामंडलेश्वरों के लिए भूमि आवंटन की व्यवस्था अलग रखी गई है। अखाड़े अपने स्तर से महामंडलेश्वरों को जमीन उपलब्ध कराएंगे। 2021 कुंभ मेले में कोरोना संक्रमण के कारण व्यवस्थाएं सामान्य रूप से नहीं हो सकी थीं। बीच में ही मेले को स्थगित करना पड़ा था, लेकिन इस बार सरकार अर्द्धकुंभ मेले को पूर्ण कुंभ की तर्ज पर आयोजित कर रही है। सभी साधु संत सरकार के इस फैसले के साथ हैं। इस बार मेला प्रशासन शुरुआत से ही तैयारियों को गति देने में जुटा है।
बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने बताया कि कुंभ मेले में साधु संतों का एक अलग नगर बस जाता है। उसमें शंकराचार्य, माधवाचार्य जैसे अन्य महापुरुषों के नाम पर अन्य कई सारे नगर बनाए जाते हैं, जिनमें बड़े-बड़े पंडाल लगते हैं। सेक्टर और जोन में अधिकारियों की तैनाती की जाती है। वहां बिजली, पानी, सड़क और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रशासन करता है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु यहां रहकर भजन कीर्तन इत्यादि करते हैं।
नया अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने बताया कि कुंभ मेले में साधु-संत और प्रशासन एक दूसरे का सहयोग करते हैं। इस बार हरिद्वार कुंभ मेले की भी भव्य और दिव्य तैयारी की जा रही हैं। कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालु मीठी यादें लेकर जाएं, इसके लिए साधु-संत भी पूरी तरह से कटिबद्ध हैं। मेला प्रशासन के साथ साधु संत भव्य कुंभ का आयोजन करेंगे। अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि कुंभ मेले में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं शिविर लगाती हैं। उसी के तहत भूमि आवंटित करने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। 30 अक्टूबर तक आवेदन लिए जाएंगे और उसके बात भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हरिद्वार कुंभ में बसाया जाएगा साधु-संतों का अलग नगर